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आर्थिक मोर्चों पर चीन को घेरता भारत


Lucknow:कन्हैया पांडे टिक टॉक के कुल यूजर्स में 30% यूजर्स भारत से हैं और टिक टॉक कंपनी का 10% रेवेन्यू भारत से जाता है। कुल मिलाकर चाइनीज कंपनियां भारत से बहुत बड़ी मात्रा में रेवेन्यू जनरेशन ऐप के माध्यम से करती है जबकि प्ले स्टोर में इन एप्स के ढेर सारे विकल्प भी मौजूद है और भारतीय उनका चुनाव कर सकते है। नई दिल्ली: वर्तमान समय में युद्ध रणभूमि में कम परंतु मनोभूमि में अधिक लड़ जाता है आज का जमाना फिजिकल वार का ना होकर ट्रेड वॉर का है। भारत व चीन के मध्य बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने 59 चाइनीज ऐप को बैन करने का निर्णय लिया है जिसमें टिक टॉक, वीचैट, शेयर इट, यूसी ब्राउजर जैसे पॉपुलर आप भी शामिल है। Government bans 59 mobile apps 📲 including #TikTok, likee, UC Browser, etc.This decision is a targeted move to ensure safety and sovereignty of Indian cyberspace & to safeguard interests of crores of Indian mobile/internet users🔽Here's the list🔽https://t.co/aKgmnAglOs pic.twitter.com/ooTUWj6R5E— PIB India (@PIB_India) June 29, 2020 सरकार ने यह निर्णय सूचना प्रौद्योगिकी की धारा 69A के तहत लिया है जिसके तहत सरकार को यह अधिकार होता है की, सरकार ऐसे किसी भी एप्स पर प्रतिबंध लगा सकती है जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा देश की एकता और संप्रभुता को खतरा महसूस होता हो। यह चाइनीज ऐप, जब आप और हम इंस्टॉल करते हैं तो ये एप्स ढेर सारे परमिशन मांगते हैं जिससे बड़ी मात्रा में भारतीयों का पर्सनल डाटा इन चाइनीज ओनर कंपनियों को चला जाता है और इन कंपनियों को चीन की सरकार सपोर्ट और संरक्षण देती है ऐसे में देश की सुरक्षा की दृष्टि से एक खतरनाक स्थिति उत्पन्न हो सकती है। लंबे समय से इन एप्स को बैन किए जाने की बात चल रही थी। डेटा का महत्व इस बात से भी समझा का सकता है कि चीन ने विश्व की बड़ी से बड़ी सोशल नेटवर्किंग की कंपनियों को अपने देश में प्रवेश करने से रोक रखा है।चीन में ना तो गूगल है ना ट्विटर और ना ही फेसबुक चीन ने इन कंपनियों की क्लोन कंपनी अपने देश में खड़ा कर लिया है। अर्थात बड़े ही सामरिक तरीके से चीन विश्व के समस्त देशों के नागरिकों का डेटा इकट्ठा तो करता है पर अपने देश का डेटा बाहर ट्रांसफर नहीं होने देता। वर्तमान युग सूचना क्रांति का युग है और जिस देश के पास जितनी सूचनाएं हैं वह देश उतना ही मजबूत है अगर चीन के आंतरिक स्थिति की चर्चा करें तो चीन में लोकतंत्र ना होने के कारण मीडिया पर जबरदस्त नियंत्रण है,चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की तानाशाही सरकार है और यहां विपक्ष लगभग शून्य है। इस पार्टी का जासूसी तंत्र इतना मजबूत है की पिछले दिनों जब ऑस्ट्रेलिया में चीन विरोधी प्रदर्शन हो रहे थे और इन प्रदर्शनों में ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे एक चीनी छात्र ने भाग लिया तो उसके चीन में स्थिति घर पर पुलिस पहुंच गई और उसके परिवार से कहा गया कि अपने बच्चे को समझाएं अन्यथा इसका खामियाजा पूरे परिवार को भुगतना पड़ेगा। इन परिस्थितियों में क्या चाइनीज ऐप को बंद करके चीन को हम आर्थिक रूप से कुछ परेशान कर सकते हैं? जानकारों का मानना है कि इस सरकार के द्वारा उठाया गया यह एक बेहतरीन कदम है क्योंकि फिजिकल गुड्स को बैन करने पर हमें अपनी जरूरतों के साथ समझौता करना पड़ सकता है लेकिन वर्चुअल आधार पर अर्थात एप्स को बैन कर के हम अपने देश को कम से कम प्रभावित करके चीन को आर्थिक रूप से अधिक से अधिक प्रभावित कर सकते हैं क्योंकि वर्तमान में भारत में 800 मिलियन से भी अधिक स्माटफोन यूजर्स है और लगभग हर फोन में शेयर इट ऐप पाया जाता है। इस लिहाज से भारतीय बाजार यह ऐप बड़े स्तर पर राजस्व की उगाही करता है। अगर टिक टॉक की बात करे टिक टॉक के कुल यूजर्स में 30% यूजर्स भारत से हैं और टिक टॉक कंपनी का 10% रेवेन्यू भारत से जाता है। कुल मिलाकर चाइनीज कंपनियां भारत से बहुत बड़ी मात्रा में रेवेन्यू जनरेशन ऐप के माध्यम से करती है जबकि प्ले स्टोर में इन एप्स के ढेर सारे विकल्प भी मौजूद है और भारतीय उनका चुनाव कर सकते है।
Dastak Times